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विधायक का खास’ बताकर गुंडागर्दी करता था राकेश आर्मो? एफआईआर के बाद भी पार्टी क्यों रही मौन

जबलपुर।
बरगी पुलिस को आज बड़ी सफलता हाथ लगी जब उसने पिछले पाँच महीनों से फरार चल रहे भाजयुमो मंडल अध्यक्ष राकेश उर्फ गोलू आर्मो को दबोच लिया। आरोपी पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहित कई गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज है और पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी। एसपी ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹5,000 का इनाम भी घोषित किया था। पुलिस ने उसके कब्जे से एक स्कॉर्पियो वाहन भी बरामद किया है।

5 महीने से पुलिस को दे रहा था चकमा

बरगी पुलिस राकेश आर्मो के सभी साथियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी, लेकिन मुख्य आरोपी लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचता रहा। आज उसे एक विशेष टीम ने घेराबंदी कर गिरफ्तार किया।


कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?

17 अगस्त 2015 की रात, घमापुर निवासी शरद यादव अपने दोस्तों आशुतोष नाथ, अभिलाष चौधरी, विष्णु रजक और राहुल पाठक के साथ एसएसबी रिसोर्ट में जन्मदिन की पार्टी मना रहे थे।

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इसी दौरान अभिलाष बाहर फोन कर रहा था और सिगरेट पी रहा था। तभी बरगी निवासी अंकित पटेल और राजेंद्र पटेल ने उससे सिगरेट मांगी। अभिलाष ने मना किया, और यह मामूली सी बात गंभीर विवाद में बदल गई।

राजेंद्र पटेल ने तुरंत भाजयुमो मंडल अध्यक्ष राकेश आर्मो को कॉल किया।


फरसा और चाकू लेकर पहुँचा भाजयुमो नेता

कुछ ही मिनटों में राकेश आर्मो अपने साथियों
अंकित पटेल, राजेंद्र पटेल, बाबू और संगम के साथ रिसोर्ट पहुँच गया।

आरोपियों ने आते ही फरसा और चाकू से हमला कर दिया

बीच-बचाव करने पहुँचे आशुतोष और अन्य युवक भी घायल हो गए।
पीड़ित किसी तरह जान बचाकर बरगी पुलिस चौकी पहुँचे और शिकायत दर्ज कराई।


एफआईआर के बाद भी संगठन क्यों चुप?

स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि:

भारी आरोप, फरार आरोपी और घोषित इनाम — फिर भी भाजपा ने क्यों नहीं की कार्रवाई?

सूत्रों के अनुसार:

  • राकेश आर्मो बरगी विधानसभा के विधायक नीरज सिंह का बेहद खास माना जाता है।

  • बताया जाता है कि उसी की सिफारिश पर उसे भाजयुमो मंडल महामंत्री बनाया गया था।

  • विरोधियों का आरोप है कि विधायक की शह के कारण आरोपी वर्षों से दबंगई करता रहा

इसके बावजूद:

  • न तो जिला अध्यक्ष भाजपा ग्रामीण ने कोई कार्रवाई की,

  • न ही पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आरोपी को निलंबित या निष्कासित किया।

सवाल यह भी उठ रहा है कि

अपराध में नाम आने के बाद भी पार्टी चुप क्यों? आखिर संरक्षण कौन दे रहा है?

चौंकाने वाली बात यह है कि कई भाजपा नेता इस विषय पर बयान देने से बच रहे हैं, कुछ के फोन बंद मिले।


पुलिस की कार्रवाई

बरगी पुलिस ने सतत निगरानी और सर्च ऑपरेशन के बाद:

  • आरोपी को गिरफ्तार किया

  • स्कॉर्पियो जब्त की

  • न्यायालय में पेश किया

पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है।


निष्कर्ष

यह पूरा मामला एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा करता है कि:

राजनीतिक संरक्षण और अपराध की गठजोड़ पर आखिर कब लगेगी रोक?

क्या भाजपा आरोपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी?

या यह मामला भी फाइलों में धूल खाता रहेगा?

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